क्यूं
ज़िन्दगी के मायने जुदा हैं
इंसान एक
पर कई खुदा हैं
यूं तो हर डगर है राह लेकिन
दूरी पे ये मंजिल का गुमाँ हैं
जब जागती है ज़िन्दगी
और सोते हैं मुक़द्दर
तब कहीं जाके
हकीकत के समंदर
होते बयां हैं ...
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