उम्मीद की बेवकूफी देखो
सब जान के भी कुछ और आजमाए हैं
काश खुद में रह पाते तो औरों की
ज़रुरत क्या होती
दोस्तों यही सच्चा ज्ञान का मोती है
दूसरे कदर जानते नहीं अपनी
अपनी कीमत तो खुद अपनी नज़र होती है
हर रिश्ते से गेहरे ज़ख्म खाए हैं...
भूल के पिछली चोटें फिर नए लोग आजमाए है
अफ़सोस बस इतना है
रिश्तों के मैदान में
खेले बहुत खूब हम
फिर भी
जीरो बना के आये हैं..
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