Namaskar
a blog by o p rathore
Tuesday, September 20, 2011
maun
इच्छाओं के पेड़ लगाये मैंने थे
कांटे उगे जो उसपे
वो भी पैने थे
फूलों पे जो रंग चढ़ा वो
गंधला था
धूप पड़ी जो उसपे लगभग
काली थी
बेचैन हर पत्ता हर एक
डाली थी
इच्छाओं के शोर में
सब मौन हुआ
ग़लतफ़हमियाँ
मन में सौ सौ पाली थीं
गलतफहमियां मन में
सौ सौ पाली थीं
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