मिलना कभी ख़त्म नहीं होता
परिचित में अजनबी सदा रहता है
वो आसमान है वहाँ क्या कुछ नहीं होता
जितना मिलता है उतना छुपा रहता है
पर्दा हटा के मिलते हैं कुछ लोग यूं भी
दिखता है बहुत कुछ बहुत ढंका रहता है
ये उम्मीद की मिल जाएगी तह सागर की
अंतिम छोर का किसको पता रहता है
अभी नहीं कही मैंने अपने दिल की तुमसे
जितना कह दूं उतना बचा रहता है।।।
ये खामोश दिल ऊपर से बयान रहता है
एक अफ़सोस है जो हर उम्र में जवां है।
एक डाल है तेरी यादों की
जिसका हर पत्ता पतझड़ में भी हरा रहता है
ये मालूम नहीं कहाँ से मिलती है इसे रौनक
दिल है जो बेजान पड़ा रहता है
ये दिल है जो बेजान पड़ा रहता है।।।
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