तु जीने का हुनर भी देना
पाँव बक्शे है, तो तौफी के सफ़र भी देना
गुफ्तगू तुने सीखायी है, तो अब बतोमे असर भी देना
मेरे अंधे असुलोंको तराजू देदे ,
मेरे मौला, मेरे मालिक
मुझे जज्बात पे काबू देदे ,
मै समुन्दर भी किसी गैर के हाथोसे ना लू ,
और इक बुंद भी समुन्दर है, अगर तु देदे
I dont know who has written this... but I dedicate on that anonymous person s behalf to Osho...
पाँव बक्शे है, तो तौफी के सफ़र भी देना
गुफ्तगू तुने सीखायी है, तो अब बतोमे असर भी देना
मेरे अंधे असुलोंको तराजू देदे ,
मेरे मौला, मेरे मालिक
मुझे जज्बात पे काबू देदे ,
मै समुन्दर भी किसी गैर के हाथोसे ना लू ,
और इक बुंद भी समुन्दर है, अगर तु देदे
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